हो गया फैसला : अब बेफिक्र होकर कीजिए पेट्रोल पंप पर कार्ड पेमेंट

लाइव सिटीज डेस्क : डीजल/ पेट्रोल भराने के लिए कार्ड से पेमेंट करने वालों के लिए अच्छी खबर. देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने यह निर्णय लिया है कि क्रेडिट/डेबिट कार्ड से होने वाली पेमेंट पर ट्रांजेक्शन कॉस्ट वह खुद वहन करेंगी. इससे पहले पेट्रोल पंप वालों ने कार्ड पर लगने वाले शुल्क को लेकर कार्ड पेमेंट लेने से ही मना करने का फैसला लिया था. लेकिन केंद्र सरकार द्वारा बीच-बचाव के बाद उनलोगों ने 13 जनवरी तक यह फैसला टाल दिया था. लेकिन अब इस नए फैसले के बाद  इस मामले में ऊहापोह की स्थिति खत्म हो गई है.

आपको बता दें कि  रविवार 8 जनवरी को पेट्रोल पंप डीलर्स ने घोषणा की थी कि  वे 9 जनवरी से क्रेडिट और डेबिट कार्ड के माध्यम से पेट्रोल और डीजल खरीद का भुगतान स्वीकर नहीं करेंगे.

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार और उपभोक्ता एमडीआर शुल्क का वहन नहीं करेंगे. उन्होंने कहा यह ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और बैंकों के बीच का एक बिजनेस मॉडल है और यह फैसला उन्हें ही करना चाहिए.

क्या था मुद्दा –

दरअसल मामला बैंकों और पेट्रोलियम डीलर के बीच उलझा हुआ है. बैंक द्वारा प्रति ट्रांजेक्सन 1% चार्ज वसूला जा रहा है. जिससे नाराज पेट्रोलियम डीलर्स ने क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड पेमेंट का ही बहिष्कार करने की चेतावनी  दी है.

अगर वहीं पेट्रोल पंप पर सिर्फ कैश में ट्रांजेक्सन चलता रहा तो लाखों गाड़ी वालो को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा.

क्रेडिट और डेबिट कार्ड द्वारा पेट्रोल पंप पर पेमेंट एक्सेप्ट नहीं करने का मामला उस समय आया है जब केंद्र ने पेट्रोल पंप पर कैशलेस पेमेंट करने पर 0.75% कैशबैक का ऑफर देने की बात की थी.
रवीन्द्रनाथ ने कहा कि सभी पेट्रोलियम डीलर्स का लाभांश आयल मार्केटिंग कंपनी के द्वारा तय किया जाता है. और लाभांश की सीमा 0.3% से 0.5 % तक रखी गई है.
पेट्रोल पंप के एक मैनेजर ने कहा कि अब पब्लिक हमें गुंडों के नजरिये से देखेगी, कि हमलोग सिर्फ कैश में तेल दे रहे हैं. लेकिन सच्चाई कुछ और है- पेट्रोल/डीजल पर हाइली रेगुलेटेड होता है. हमलोग अपना खुद का रेट नहीं फिक्स कर सकते हैं.  इसलिए सबसे अच्छा उपाय है कि हमलोग कार्ड से पेमेंट एक्सेप्ट नहीं करें.
जब रवीन्द्रनाथ से पूछा गया कि क्या लोगों को इस तरह सजा देना जायज है ? तो उन्होंने कहा कि यह हमारे कण्ट्रोल में नहीं है कि हम अपने लिए कितना प्रॉफिट तय करें.  OMC इसे फिक्स करती है.  और इस समय OMC इस मामले को सुलझाने की जगह कन्नी काट रही है. जब हमने जॉर्ज पॉल( OMC की ओर से CO-ordinate करने वाले)  से इस मामले में बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि यह आपके और बैंक का मामला है. इसका हल आप ही निकाले.

उन्होंने आगे कहा कि यह निर्णय देश के तमाम पेट्रोल पंप के द्वारा ली गई है. सो हमलोगों का कदम खींचने का सवाल ही पैदा नहीं होता.  यह सिर्फ 1% चार्ज वापस लेने का मामला नहीं है यह मामला हमारे सर्वाइवल का है. हम इस तरह से कार्य नहीं कर सकते हैं.  यह तब तक जारी रहेगा जब तक बैंक अपना निर्णय वापस नहीं लेती है.
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