पटना : हवा ने किया एक साल में 2600 मर्डर, 2 लाख को दी टीबी, 1100 को हार्ट अटैक

पटना : प्रदूषित हवा के कारण बिहार की राजधानी पटना में एक साल के अंदर 2600 लोगों की मौत, करीब 2 लाख लोगों को अस्थमा की बीमारी और 1100 लोगों को दिल का दौरा पड़ा है. चौंकिए मत. ये हम नहीं कह रहे हैं. बल्कि पर्यावरण संस्था ग्रीनपीस इंडिया की एक रिपोर्ट ने बिहार में वायु प्रदूषण से लोगों पर होने वाले गंभीर परिणाम को सामने लाया है.

ग्रीनपीस इंडिया द्वारा सोमवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार बिहार की राजधानी पटना में वर्ष 2012 के दौरान प्रदूषित हवा की वजह से 2600 मौत, दो लाख अस्थमा के दौरे और 1100 ह्रदयाघात के मामले दर्ज किए गए हैं. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों की संख्या तंबाकू के कारण होने वाली मौतों से कुछ ही कम रह गयी है. ग्रीनपीस की ये रिपोर्ट 24 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के 168 शहरों में वायू प्रदूषण के स्तर का अध्ययन कर बनाई गई है.

PM 10 और PM 2.5 है वायू प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण, साल दर साल बढ़ता जा रहा PM2.5

वायू प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह हवा में घुले PM 10 और PM2.5 कण हैं. ये महीन कण हवा में इस तरह घुले होते हैं कि हमको पता भी नहीं चलता, पर ये हमारे शरीर के अंदर जाकर गहरा आघात पहुंचाते हैं. आपको बता दें कि साल दर साल हवा में PM 2.5 कणों की मात्रा बढ़ती चली जा रही है.

ग्रीनपीस की रिपोर्ट जो कि साल 2012 के वायू प्रदूषण के स्तर के आधार पर बनी है, उसके अनुसार वर्ष 2015 में पटना में PM 10 का स्तर 200 माइक्रोन घन मीटर था, जो 2016 में दिवाली के दौरान PM 2.5 कण 685. 97 माइक्रोन घन मीटर तक पहुंच गया था. सीपीसीबी के रिकार्ड के ही अनुसार 10 जनवरी 2017 को PM2.5 कण 247 माइक्रोन घन मीटर दर्ज किया गया. आपको बता दें कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा तय एनएएक्‍यू वार्षिक सीमा का तीन गुना और डब्‍लूएचओ द्वारा तय वार्षिक सीमा का 8 से 10 गुना अधिक है.

कहां से आता है ये PM 2.5

रिपोर्ट के अनुसार यह परिवहन, सड़क की धूल, घरेलू स्रोतों से उठे धुएं के उत्‍सर्जन में होता है. यह ध्‍यान देना ज़रूरी है कि शहर के भीतर होने वाला उत्‍सर्जन बाहरी वातावरण प्रदूषण में होने वाले योगदान से भिन्‍न है, क्‍योंकि बाहरी वातावरण में मौजूद प्रदूषण ज्‍यादातर शहर के बाहर की हवा से आता है.

PM 10 के लिए जीवाश्म ईंधन है जिम्मेवार

रिपोर्ट में इसके कारणों को चिन्हित करते हुए बताया गया है कि इसका मुख्य कारण जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला,पेट्रोल, डीजल का बढ़ता इस्तेमाल है. सीपीसीबी से आरटीआई के द्वारा प्राप्त सूचनाओं में पाया गया कि ज्यादातर प्रदूषित शहर उत्तर भारत के हैं. यह शहर राजस्थान से शुरु होकर गंगा के मैदानी इलाके से होते हुए पश्चिम बंगाल तक फैले हुए हैं.

सरकार को करना होगा उपाय

ग्रीनपीस इंडिया के कम्यूनिकेशन कैंपेनर अविनाश चंचल कहते हैं कि वायु प्रदूषण को अब राष्ट्रीय समस्या मानकर उससे निपटना होगा. हमारे यहां वायू प्रदूषण का स्तर WHO के मानकों से आठ गुणा तक ज्यादा है. इस खतरनाक स्थिति से निपटने के लिये तत्काल एक निगरानी व्यवस्था लागू करने की जरूरत है और ये काम सरकार को ही करना होगा. बीते महीने सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेडेड रिस्पांस सिस्टम को स्वीकार्यता दी है ताकि दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटा जा सके. ग्रीनपीस इस कदम का स्वागत करता है. दूसरे शहरों में भी इस सिस्टम को लागू करने की जरूरत है.

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