Audio-Video : ध्यान दें SSP साहब ! केस में नाम हटाने को दरोगा मांग रहा लाख रुपया, दे रहा है गाली भी

पटना : “अरे तुम लोग नहीं जानता  है कि केस डायरी में केतना खर्चा पड़ता है. बुद्धि लगाना पड़ता है. उ सब खर्चवा तो देना होगा ना. इसके बादो जब नाम हटा दिए तो डीएसपी को बताना होगा, डीएसपी पूछेगा काहे हटा दिए, इंस्पेक्टर साहेब पूछेंगे. तुमलोग नहीं समझ सकता कि हमलोगों पर केतना दबाव है. हमको तो बस 20 हजार ही बचेगा. बाकी खर्चा तो इंस्पेक्टर, डीएसपी और एसपी को देना पड़ता है.

ऊपर की लाइनें पटना पुलिस के फतुहा थाना के सब-इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार की हैं . कांड संख्या 199/16 के बतौर अनुसंधानकर्ता प्रदीप कुमार आरोपी पक्ष के परिजनों से केस डायरी में शामिल चार लोगों का नाम हटाने के एवज में एक लाख रुपए की मांग करते हैं. परिजन खुद को उतना पैसा देने में असमर्थ बताते हैं तो दारोगा साहब खुलेआम कहते हैं कि केस डायरी से नाम हटाने के लिए लिया गया पैसा इंस्पेक्टर, डीएसपी और यहां तक कि एसपी को भी देना पड़ता है.

पढ़िए पूरा मामला, क्यूं नाम हटवाने के लिए आएं परिजन

मामला फतुहा थाना का है. पिछले साल 17 मई को हुआ बहुचर्चित दोहरा हत्याकांड संख्या 199/16 . युवक और युवती की हत्या के आरोप में युवक के घर के चार लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है. दूसरी तरफ मामले के अनुसंधान के दौरान युवती का हत्यारा कोई और निकल गया जिसे भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. अब युवक के परिजन थाने के चक्कर लगा रहे हैं कि किसी तरह जेल में बंद निर्दोष लोग बाहर निकल जाएं. उसमें युवक के पिता और भाई भी शामिल हैं. वो बखूबी समझते हैं कि जब तक केस डायरी से नाम नहीं हटेगा, गिरफ्तार लोगों पर मामला चलता रहेगा. इसके लिए केस के आईओ फतुहा थाना के दारोगा प्रदीप कुमार के पास पहुंचते हैं, जहां प्रदीप कुमार परिजनों के सामने केस डायरी से नाम हटाने के लिए पैसे की मांग करते हैं. दूसरी तरफ प्रदीप कुमार ये भी मानते हैं कि जो लोग जेल में बंद हैं वो निर्दोष हैं.

‘दुनिया का कोई माई का लाल नहीं है जो केस डायरी से नाम हटाएगा’

युवक पक्ष की ओर से कुछ लोग थाने में पहुंचते हैं. असली हत्यारे की गिरफ्तारी हो जाने के बाद केस डायरी से नाम हटाने के लिए कहते हैं. इसी दरम्यान परिजनों की ओर से बात निकल आती है कि कोई जज हैं जो कह रहे थे कि मामला खत्म हो जाएगा. इस पर थाने के दारोगा जी कहते हैं कि ‘दुनिया में कोई माल का लाल नहीं है जो केस से नाम हटा दे. जे करेंगे से दारोगे जी करेंगे. हमलोग का भी तो डायरी पर खर्चा हो रहा है. डायरी पर हमलोग काम कर रहे हैं. हम तो मजबूर हैं ना जी.. झूठे ना निर्देोष को जेल भेजे हैं.’

हमको तो खाली अशोक बाबू से 25000 रुपया मिला है

परिजनों से बातचीत में आईओ प्रदीप ये स्वीकार भी करते हैं कि उन्हें परिजनों की ओर से 25 हजार रुपए मिल चुके हैं. उनके शब्दों में  एक बार बारह और एक बार छह, अठारह हजार रुपए दिए हैं… कुल मिलाकर हमको खाली अशोक बाबू 25000 रुपए दिए हैं. इस पर परिजन कहते हैं कि डायरी में नाम अभी तक है. तब आईओ कहते हैं कि ‘आप लोग एक लाख रुपए दे दिए हैं क्या? नहीं देंगे तो कइसे नाम हटेगा. जब तक हमको पइसा नहीं मिलेगा . 30 हजार में कहां से होगा. हमलोग फंसे हैं. खर्चा मिलबे नहीं करेगा तो कइसे होगा.’

पैसे के लिए मुंह खोलने से इन्कार, लेकिन महिला के सामने ही दे रहे अश्लील गालियां.

परिजनों से बातचीत के क्रम में आईओ खुलकर पैसे की मांग नहीं करने की बात करते हैं. केस डायरी में होने वाले खर्चे का हवाला देते हुए उसी खर्चे को देने की बात करते हैं. बकौल आईओ प्रदीप कुमार हम मुंह नहीं खोलते. जो इच्छा हो दे दीजिए. लेकिन वहीं आईओ साहेब थोड़ी देर पहले ही गुहार लगा रही माहिला के सामने किसी को अश्लील गालियां देने लगते हैं. बात-चीत के क्रम में महिला कई बार रोती भी है, बावजूद इसके आइओ प्रदीप कुमार खर्चा लेने की बात पर अड़े रहते हैं.

लाइव सिटीज के पास इस प्रकरण को लेकर कुल 8 ऑडियो क्लिप हैं, जिनमे दिसंबर की अलग-अलग तारीखों को केस के आईइओ प्रदीप कुमार और आरोपियों के परिजनों की बातचीत रिकॉर्ड है. इनमे से एक ऑडियो क्लिप हम आपके सामने रख रहे हैं.

 

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